निर्यात जागरूकता कार्यक्रम

बिहार से निर्यात को बढ़ावा देने और राज्य के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में स्थापित करने तथा उद्यमियों एवं युवाओं को निर्यात क्षेत्र में अवसरों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा सिडबी के सहयोग से दिनांक 21 अप्रैल, 2026 को निर्यात जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिसमें बीआईए के अधिकारियों के अलावे राज्य सरकार के वानिकी निदेशक श्री अभिषेक कुमार, सिडबी के महाप्रबंधक (बिहार-झारखंड) श्री आशीष तोपदार, उप-महाप्रबंधक श्रीमती रश्मि रंजन, एपीडा के फील्ड ऑफिसर श्री आनंद प्रकाश, ईपीसीएच के सहायक महाप्रबंधक श्री नितेश कुमार झा तथा कार्यक्रम के प्रशिक्षक डॉ. जगत शाह ने भाग लिया।
सर्वप्रथम अध्यक्ष श्री रामलाल खेतान ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि कृषि रोडमैप और औद्योगिक निवेश में वृद्धि के कारण बिहार विकास के नए आयाम छू रहा है। सड़क, बिजली और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार ने निर्यात के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया है। आधारभूत संरचना का विकास और एपीडा जैसी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी बिहार को वैश्विक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
बिहार के पास मखाना, लीची जैसे विशिष्ट कृषि उत्पाद हैं, जिनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान है। फल, सब्जियां (सब्जी उत्पादन में चौथा, फल में आठवां स्थान) और मधुबनी पेंटिंग, सिक्की कला जैसे हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक बाजार में विशिष्ट मांग है।
सरकार ने भी औद्योगिक नीतियों को तर्कसंगत बनाने और प्रोत्साहन देने जैसी कई पहलें की हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को निर्यात के लिए संभावित बाजारों के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में सिडबी के महाप्रबंधक, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, बागवानी निदेशक और निर्यात क्षेत्र के अनुभवी उद्यमी (विशेषकर श्री जगत जी) उपस्थित हैं, जिनका अनुभव प्रतिभागियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह चर्चा न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान को समृद्ध करेगी बल्कि बिहार से निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
सिडबी के महाप्रबंधक श्री आशीष तोपदार ने अपने संबोधन में कहा कि सिडबी का उद्देश्य केवल ऋण प्रदान करना नहीं, बल्कि एमएसएमई के लिए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करना है। इसमें प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग, उद्योग से संबंधित मुद्दों का समाधान और उद्यमी तैयार करना शामिल है ताकि वे उद्योग स्थापित कर सकें और निर्यात बढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि लगभग 80% आबादी कृषि पर निर्भर है। वर्तमान में बिहार की निर्यात बाजार में भागीदारी अपेक्षाकृत कम है (भारत के कुल निर्यात का 0.5% से भी कम)। समुद्र तट का अभाव और पूर्व में आधारभूत संरचना की कमी इसके मुख्य कारण रहे हैं। परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं, और इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
वानिकी निदेशक श्री अभिषेक कुमार ने कहा कि बिहार में लगभग 9 करोड़ लोग कृषि पर निर्भर हैं। किसानों की आमदनी कैसे बढ़ायी जाए, आर्थिक विकास, निवेश और विशेष रूप से कृषि उत्पादों के निर्यात को कैसे बढ़ावा दिया जाए, इसपर विषेष ध्यान देने की आवष्यकता है। राज्य के 14 जीआई टैग उत्पाद निर्यात की अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं। पलायन कम करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए निर्यात को एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने सिडबी और बैंकों से ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आग्रह करते हुए कहा कि सिडबी ने एमएसएमई के लिए ऋण सीमा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो 2001 में 1 करोड़ से बढ़कर 2025 तक 10 करोड़ रुपये हो गयी है। बिहार में बैंकों का साख-जमा अनुपात 32% से बढ़कर 45% हो गया है, और अब 60% है, जो राज्य में आर्थिक गतिविधि में वृद्धि का संकेत देता है। बिहार के लिए विशिष्ट मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है जो स्थानीय उत्पादों की क्षमता का लाभ उठाएँ।
एपीडा के प्रतिनिधि श्री आनंद प्रकाश ने कहा कि बिहार में शाही लीची, मखाना, कतरनी, सुगंधित गैर-बासमती व मर्चा चावल, जर्दालू आम एवं आलू और मशरूम (बिहार सबसे बड़ा उत्पादक) जैसे उच्च क्षमता वाले कृषि उत्पाद हैं। कई उत्पादों को जी.आई. टैग मिला है। उत्पादकों को निर्यात के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण, प्रमाणन प्रक्रियाओं और संबंधित संस्थानों के बारे में जानकारी का अभाव है। चेकलिस्ट और राज्य एजेंसियों के पास जानकारी की कमी के कारण प्रमाणन प्राप्त करने में 1-2 साल तक का समय लग जाता है।
लीची और आम जैसे उत्पादों के लिए संभावित बाजारों और खरीदारों की पहचान करने में सहायता की आवश्यकता है। मशरूम और मक्का जैसे उत्पादों के लिए मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास और उनके विपणन की समस्या है। बिहार का मक्का देश के शीर्ष उत्पादकों में से है, लेकिन उसे उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। एपेडा जिला-वार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है ताकि लोगों को निर्यात प्रक्रियाओं, पैकेजिंग सुधार और अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जुड़ने में एपेडा की सहायता के बारे में शिक्षित किया जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और जापान जैसे देशों के लिए प्रमाणन के लिए आवेदन किया गया है। उन्होंने उपस्थित उद्यमियों से अपने कार्यालय का पता देते हुए कहा कि वे कृषि निर्यात से संबंधित किसी भी तरह की सहायता के लिए कृषि भवन के अनुषंगी भवन के कार्यालय नंबर 309 में कभी भी संपर्क कर सकते हैं।


कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि हाजीपुर स्थित कंपिटेंस एक्सपोर्टस प्रा. लि., जो सूती और चमड़े के जुते इत्यादि उत्पादों के निर्यातक हैं, के श्री गणेष प्रसाद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार एक “कंज्यूमेबल स्टेट“ है, जहाँ से बहुत कम निर्यात होता है। रूस में उनके व्यक्तिगत व्यापारिक अनुभव ने उन्हें बिहार से निर्यात की संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद इंग्लैंड, फ्रांस और रूस जैसे देशों में भेजे जाते हैं। वे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजित करते है जो कि बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि अन्य देशों के साथ तुलना में, जैसे अमेरिका और मलेशिया में बिहार का निर्यात कम है।
भारत के व्यापार घाटे पर प्रकाश डाला, खासकर चीन के साथ (110 बिलियन डॉलर) और रूस के साथ (65 बिलियन डॉलर)। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नेपाल और चीन के साथ भूमि सीमा व्यापार बढ़ता है, तो बिहार को इसका लाभ होगा।
बहुत से लोग निर्यात करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं है कि शुरुआत कैसे करें। बिहार में “मैन पावर“ (संसाधन) होने की बात कही, लेकिन इसे “स्किल“ (कौशल) में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन) को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास की बात की। किसी भी इच्छुक व्यक्ति को बिहार में व्यवसाय स्थापित करने या निर्यात शुरू करने में सहायता करने की पेशकश की। उन्होंने सिडबी और बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के प्रषिक्षक डॉ. जगत शाह ने सर्वप्रथम अपना वैश्विक अनुभव का परिचय देते हुए बताया कि उनकी संस्था ने 46 देशों में कार्य किया है, 80$ भारतीय औद्योगिक क्लस्टरों में परियोजनाएँ की हैं और 9600 कंपनियों को निर्यात प्रशिक्षण दिया है।
उनके प्रस्तुतिकरण के माध्यम से दिये गये प्रषिक्षण का सारांष :-
भारत की स्थितिः भारत का निर्यात 2020-21 में 499 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 860 अरब डॉलर तक पहुँचा। लक्ष्य है 2030 तक 2000 अरब डॉलर।
निर्यात योग्य उत्पादः बिहार से मखाना, लिची, आम, मधुबनी कला, भोगलपुरी सिल्क, शहद, औषधीय पौधे, केला उत्पाद, सब्ज़ियाँ, पैकेज्ड फूड, जलेबी/गुड़, शाही लीची, जर्दालु आम आदि।
रणनीतिः किसी भी उत्पाद का निर्यात संभव है (उदाहरणः गोबर, सड़ा आलू, स्क्रैप)।
10 प्रमुख तरीकेः आयातकों की खोज, एजेंट नियुक्ति, विदेश में कार्यालय/वेयरहाउस, ई-कॉमर्स, बी2बी बैठकें, अंतरराष्ट्रीय एक्सपो, संयुक्त उद्यम, मर्चेंट एक्सपोर्ट, फ्रेंचाइज़, संस्थागत बिक्री व टेंडर।
नवाचारः पैकेजिंग में फत्कोड, रियल टाइम ऑर्डर ट्रैकिंग, डिजिटल कैटलॉग, वर्चुअल फैक्ट्री टूर।
सुरक्षाः मरीन इंश्योरेंस, भुगतान बीमा, गुणवत्ता निरीक्षण, मुद्रा उतार-चढ़ाव से बचाव।
।प्का उपयोगः बाज़ार खोज, खरीदार पहचान, उत्पाद कैटलॉग निर्माण, ऑनलाइन बातचीत व नेगोशिएशन। उन्होंने सभी को सलाह दी कि सपदामकण्पदपर अपना प्रोफाईल जरूर बनायें।
मात्र 10,000 रूपये में कोई भी अपना e-commerce प्लेटफॉर्म बना सकता है।
उनके प्रस्तुतिकरण का सारांष था कि “हर उत्पाद निर्यात योग्य है, डेटा और नवाचार से निर्यात को बढ़ाया जा सकता है, और बिहार के पारंपरिक व आधुनिक उत्पाद वैश्विक बाज़ार में बड़ी संभावना रखते हैं।
अंत में उन्होंने आकांक्षी निर्यातकों को संदेश दिया कि knowledge is raw material.
कार्यक्रम के अंत में महासचिव श्री अमरनाथ जयसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आशा व्यक्त की कि यह पहल बिहार को निर्यात बाजार में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व उपाध्यक्ष श्री संजय गोयनका ने किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में बीआईए के अधिकारीगण व उद्यमी सदस्यगण, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधिगण, निर्यात क्षेत्र में अवसर तलाश रहे युवा एवं प्रेस तथा मीडिया के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
इस निर्यात जागरूकता कार्यक्रम की श्रृंखला के अंतर्गत अगला और अंतिम कार्यक्रम 17 एवं 18 जून को बीआईए में निर्धारित है जिसमें डॉ. जगत साह चयनित एक – एक आकांक्षी निर्यातकों को आमने – सामने प्रषिक्षण देंगें।