2-Day National Seminar-Cum-Exhibition on “Development of Food Processing Industries in Bihar – Opportunities & Challenges”

बिहार उद्योग संघ (BIA) द्वारा दिनांक 18 एवं 19 जुलाई 2025 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार सह प्रदर्शनी में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की व्यापक संभावनाओं, नीतिगत संवाद तथा निवेश अवसरों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान सभा अध्यक्ष श्री नंदकिशोर यादव जी ने किया।

विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री एस.एन. झा जी (उप महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR) श्री इंद्रजीत यादव जी (संयुक्त निदेशक एवं HOO, MSME DFO, पटना) तथा डॉ. राणा सिंह जी (निदेशक, चन्द्रगुप्त प्रबंध संस्थान) सहित अन्य अनेक वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इन सभी ने बिहार में ग्रामीण उद्यमिता, संस्थागत सहयोग और औद्योगिक विकास को गति देने संबंधी अपने विचार साझा किए।

यह आयोजन निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बिहार को ‘फूड प्रोसेसिंग हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावशाली पहल साबित हुआ।
बिहार के विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार आवश्यक श्री नंदकिशोर यादव, अध्यक्ष बिहार विधान सभा
बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री नंदकिशोर यादव ने BIA द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय सेमिनार
Development of Food Processing Industries in Bihar: Opportunities & Challenges” में कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में इन उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त होगा, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ होगी बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के माध्यम से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं, जो सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम होगा।














उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य में आम्रपाली आम, शाही लीची, मखाना, अंगूर और मक्का जैसे विशिष्ट कृषि उत्पादों की भरपूर संभावनाएँ हैं। आज बिहार देश का 25% मक्का और 80% मखाना उत्पादन करता है, जिसमें से 10% से अधिक निर्यात भी होता है। खाद्य प्रसंस्करण के जरिए इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में ₹54,000 करोड़ के विशेष पैकेज की योजना बनाई है, जो निवेश, उत्पादन और निर्यात को बल देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी।
श्री यादव ने कहा कि बिहार में अब वह आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है जो खाद्य उद्योगों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और विस्तार को मजबूती देती है। उन्होंने एक समर्पित आर्थिक ज़ोन (Dedicated Economic Zone) की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे उद्योगों को आवश्यक संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें तथा निवेश को प्रोत्साहन मिल सके।
उन्होंने सेमिनार में आयोजित खाद्य प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि प्रस्तुत 32 उत्पाद राज्य की जैविक विविधता और कृषि समृद्धि के प्रतीक हैं। उन्होंने आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे मंच किसानों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देते हैं और राज्य के समग्र विकास को दिशा प्रदान करते हैं।
खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव – डॉ. एस.एन. झा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कृषि यांत्रिकी विभाग के उप महानिदेशक डॉ. एस.एन. झा ने “राष्ट्रीय सेमिनार – Development of Food Processing Industries in Bihar” में कहा कि बिहार जैसे कृषि समृद्ध राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का सुदृढीकरण न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का भी माध्यम बन सकता है। उन्होंने विशेष रूप से सूखाग्रस्त क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ यदि प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थानीय स्तर पर स्थापित की जाएं तो उपज का बेहतर मूल्य, विपणन की सुविधा और उत्पाद गुणवत्ता में सुधार संभव है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फूड प्रोसेसिंग केंद्रों को गाँवों तक पहुँचाना जरूरी है, ताकि मूल्यवर्धन का लाभ सीधे किसानों को मिले। डॉ. झा ने यह सुझाव भी दिया कि ऐसे उपक्रमों के लिए Visited Economic Zone जैसी नीतिगत पहल की आवश्यकता है, जहाँ तकनीकी मार्गदर्शन, मानक-आधारित मशीनरी और प्रसंस्करण वातावरण उपलब्ध हो। उनका मानना था कि बिहार के जैविक उत्पादों और क्षेत्रीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए यदि समुचित संरचना विकसित की जाए, तो राज्य देश के अग्रणी खाद्य प्रसंस्करण हब में गिना जा सकता है।
उन्होंने BIA द्वारा आयोजित इस सेमिनार को कृषि और उद्योग के समन्वय का एक व्यावहारिक मंच बताते हुए इसकी सराहना की, जहाँ नीति, निवेश और नवाचार साथ-साथ संचालित होते हैं।
श्री इंद्रजीत यादव (MSME DFO, पटना)
श्री इंद्रजीत यादव, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख कार्यालय प्रमुख, MSME – DFO,
पटना ने BIA द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में कहा कि बिहार में
खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की असीम संभावनाएं हैं, जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने और राज्य की औद्योगिक प्रगति को नई दिशा देने में समर्थ हैं। उन्होंने ‘विलेज इकोनॉमिक जोन’ जैसे मॉडल को ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बताते हुए MSME मंत्रालय की ओर से दी जा रही अनुदान सहायता और योजनाओं की जानकारी साझा की। श्री यादव ने कार्यक्रम को निजी और सरकारी भागीदारी के लिए एक प्रेरक मंच बताते हुए BIA की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। डॉ. राणा सिंह (निदेशक, चन्द्रगुप्त प्रबंध संस्थान)
श्री डॉ. राणा सिंह, निदेशक, चन्द्रगुप्त प्रबंध संस्थान ने BIA द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में ‘फूड प्रोसेसिंग केंद्र’ स्थापित करने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं, जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने और निवेश के अवसर बढ़ाने में सहायक होंगे। उन्होंने MSME क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा कि स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थागत सहयोग और नीति-समर्थन की आवश्यकता है, और इस दिशा में रणनीतिक मॉडल राज्य के विकास की रीढ़ बन सकते हैं।
महासचिव श्री अमरनाथ जयसवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।


