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बिहार रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपो 2025

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष कर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जागरूकता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा तारामंडल परिसर में तीन-दिवसीय सेमिनार-सह-प्रदर्शनी बिहार रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपो 2025 का आयोजन किया गया।
माननीय उप-मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी ने उद्घाटन किया तथा राज्य के ऊर्जा मंत्री माननीय श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव जी इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। इस उद्घाटन सत्र में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उपमहाप्रबंधक (एसएमई) श्री तरूण सक्सेना, सिडबी, पटना शाखां की महाप्रबंधक श्रीमती अनुभा प्रसाद, पटना के मेयर श्रीमती सीता साहू, विषिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इस अवसर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उपमहाप्रबंधक (एसएमई) श्री तरूण सक्सेना ने पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों से बैंकों या अन्य वित्तिय संस्थानों से त्रृण लेकर छतों या जमीन पर सूर्य घर पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर लगाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सोलर प्रोजेक्ट की आयु 25 वर्ष की होती है और त्रृण का पैसा 6 से 7 वर्षों में वापस हो जाता है।
इस अवसर पर सिडबी की महाप्रबंधक श्रीमती अनुभा प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य 500 गीगावाट है, जिसमें सौर ऊर्जा का लक्ष्य 300 गीगावाट है। इसमें बिहार का लक्ष्य 400 मेगावाट है। सिडबी महाप्रबंधक ने बिहार में सोलर प्लांटों एवं सोलर कंपोनेंट्स उत्पादन प्लांट्स की स्थापना के लिए उद्यमियों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया और कहा कि बिहार जैसी अनुदान की नीति अन्य किसी राज्य में नहीं हैं। अंत में उन्होंने कहा कि ध्यान रहे हम सभी के लिए केवल एक ही ग्रह उपलब्ध है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए माननीय उप-मुख्य मंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार के पहले 17 लाख लोगों को बिजली की सुविधा थी, यह सुविधा पिछले 20 वर्षों में बढ़कर 2 करोड़ 14 लाख लोगों तक पहुंच गयी है। बिहार सरकार अपने 60 हजार करोड़ रुपये सालाना आंतरिक राजस्व का एक चौथाई 15 हजार करोड़ बिजली के अनुदान पर खर्च करती है। गाँव में 60/64 पैसे प्रति यूनिट बिजली मिल रही है।
उन्होंने बताया कि अगले 15 दिनों में नवीकरणीय ऊर्जा और पंप स्टोरेज नीति – दोनों नीतियों को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी। जो कम्पनी राज्य में निवेष करेगी उन्हें ज्यादा लाभ होगा। सन फार्मा ने बिहार में 1200 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा प्लांट के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

सेमिनार-सह-प्रदर्शनी का दूसरा दिन

सेमिनार-सह-प्रदर्शनी के दूसरे दिन दिनांक 28 जून 2025 को तारामंडल सभागार में दो तकनीकी सत्र आयोजित किये गये। जिसमें सौर ऊर्जा के उपभोग, उत्पादन, सरकार की नीति, बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं की भूमिका जैसे विभिन्न विषयों पर गहनता से चर्चा हुई।
पहला तकनीकी सत्र – पीएम सूर्य घर योजना पर आयोजित किया गया। पीएम सूर्य घर योजना 15 फरवरी 2024 को लाँच किया गया जिसका उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। यह योजना न केवल घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली के दरों में कमी लाती है बल्कि इससे सरकार को सालाना 75 हजार करोड़ रुपया बचाने का लक्ष्य भी है।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत कोई घरेलू उपभोक्ता अधिकतम 10 किलोवाट तक का सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करा सकता है लेकिन सरकार की ओर से अनुदान देने की व्यवस्था केवल 3 किलोवाट तक की लागत पर हीं है। 1 किलोवाट तक के सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना पर 30 हजार रुपये, 2 किलोवाट पर 60 हजार रुपया तथा 3 किलावाट पर अधिकतम 78 हजार रुपया अनुदान देने की व्यवस्था है। 3 किलोवाट सोलर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने पर उपभोक्ता को प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल सकेगी। इस योजना का लक्ष्य देश के 10 करोड़ घरों में सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) स्थापित करना है।
दूसरे तकनीकी सत्र में उद्योगों को सौर ऊर्जा लगाने से क्या फायदा होगा, इस विषय पर विस्तृत रूप से चर्चा हुई। इसमें भाग ले रहे अतिथि वक्ताओं द्वारा यह बताया गया कि जिस तरह से पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोत से प्राप्त होने वाली बिजली के मूल्य में सालाना वृद्धि हो रही है जिससे उद्योगों के उत्पाद का लागत बढ़ता जा रहा है ऐसी परिस्थिति में औद्योगिक इकाईयों को बाजार के प्रति स्पर्द्धा में अपने आपको बनाये रखने के लिए सौर ऊर्जा एक बहुत अच्छा विकल्प है। चर्चा में यह भी बात सामने आयी कि औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा स्थापित सौर ऊर्जा प्रणाली का लागत की उगाही 4 से साढे चार वर्षों में उनके बिजली बिल में आने वाले कमी से हो जाती है। एक ओर सौर ऊर्जा जहां सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है वहीं यह प्रदूषण रहित बिजली भी उपलब्ध कराती है।
तकनीकी सत्र में अतिथि वक्ता के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के उपमहाप्रबंधक श्री दीपक कुमार, सिडबी की उपमहाप्रबंधक श्रीमती रश्मि रंजन व प्रबंधक श्री शाश्वत, देश की अग्रिणी सौलर पैनल के निर्माता नोवासिस के अध्यक्ष श्री अशोक सिंह तथा रेजोन सोलर के महाप्रबंधक श्री अमित, देश के अग्रणी इंर्भटर निर्माता पावर वन माइक्रो सिस्टम के श्री शशी मिश्रा ने अपने विचारों को साझा किया। बैंक तथा वित्तीय संस्था के भाग ले रहे अधिकारियों द्वारा सरकार की ओर से चलायी जा रही योजना में बैंकों की भूमिका तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन सोलर हब के श्री केशव कुमार ने किया जबकि दूसरे तकनीकी सत्र का संचालन पूर्व उपाध्यक्ष श्री संजय गोयनका ने किया।
तकनीक सत्रों के उपरान्त पहल सोलर, नोवासिस ग्रीन एनर्जी लि., सात्विक ग्रीन एनर्जी लि., डेये एंड व्हाटथट, पावर वन माइक्रो सिस्टम्स प्रा. लि,, सोलर हब प्रा. लि,, ईएनए सोलर प्रा. लि,, सुग्स लॉयड लि. इत्यादि ने उत्पादों को प्रदर्षित किया।

समापन सत्र

दिनांक 29-06-2025 को समापन सत्र के पूर्व एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री कुसुम योजना के साथ-साथ कृषि, वानिकी एवं कोल्ड स्टोरेज में सौर ऊर्जा की क्या भूमिका है, सरकार की क्या नीति है, पर चर्चा हुई। तकनीकी सत्र में कृषि विभाग के वानिकी निदेश श्री अभिषेक कुमार, बीएसपीजीसीएल के एजिक्यूटिव इलेक्ट्रीकल इंजिनियर श्री राकेश कुमार, बिहार काउंसील ऑॅफ साइंस एण्ड टेक्नोलोजी के परियोजना निदेशक डा0 अनंत कुमार, बिहार कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री दीपक चौरसिया ने अतिथि वक्ता के रूप में अपने विचारो को रखा। तकनीकी सत्र का संचालन श्री सुबोध कुमार ने किया।
वानिकी निदेशक श्री अभिषेक कुमार ने जानकारी दी कि सरकार कोल्ड स्टोरेज स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से एक कोल्ड स्टोरेज नीति ला रही है जो मंत्रिमंडल के स्वीकृति के लिए गया हुआ है। नीति में यह प्रावधान किया जा रहा है कि हर प्रखंड में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना हो। राज्य के प्रत्येक बाजार समिति में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना को प्रोत्साहित किया जायेगा। नई नीति में पारम्परिक कोल्ड स्टोरेज के साथ -साथ ‘‘लॉ कॉस्ट – लॉ कैपिसिटी कोल्ड स्टोरेज’’ की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज उद्यमियों से राज्य में मल्टी-प्रोडक्ट्स भंडारण वाले कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जाने का सुझाव दिया।
तारामंडल के परियोजना निदेशक डा0 अनंत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सोलर पम्प योजना किसानों के आय को दुगुना करने की एक अच्छी योजना है। लेकिन सरकार की नीतियों एवं योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण राज्य में सोलर इनर्जी की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सुझाव रखा कि राज्य के सभी जिलों के सरकारी अभियंत्रण विद्यालयों में कैंप लगा कर जनप्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र के लोगों को सोलर पम्प तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर जैसी महत्त्वपूर्ण योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाय।
समापन समारोह को सम्बोधित
समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए माननीय नगर विकास एवं आवास मंत्री श्री जीवेश कुमार मिश्रा ने घोषणा की कि 513 करोड़ रुपये की लागत से पटना में नगर निगम समेत राज्य के कुल 11 नगर निकायों के कचरे से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने 33 प्रतिशत राशि जारी कर दी है। शेष राशि पीपीपी मोड पर निजी भागीदारी से वहन की जायेगी। इस प्लांट से बिजली के साथ इथेनॉल एवं कंपोजिट खाद का भी उत्पादन होगा। बची हुई सामग्री लैंड फिलिंग मटेरियल के रूप में इस्तेमाल की जायेगी।
माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि सरकार की योजनाओं को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के मध्य आपसी सामन्जस्य होना चाहिए।
इस अवसर पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव श्री अमिर सुबहानी ने बीआईए के सफल प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न तकनीकी सत्रों से काफी महत्वपुर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आयोग ने RPO Regulations, Green Energy Open Access, Net और Gross Metering इत्यादि पर विनियमन का गठन किया है।
यदि बीआईए या अन्य संगठनों या उपभोक्ता समूह की ओर से राज्य में सौर ऊर्जा या किसी अन्य ऊर्जा से संबंधित विनियमन के गठन के लिए सुझाव आता है तो आयोग निश्चित रूप से उसपर विचार करेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में उर्जा भंडारण क्षमता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में 2164 मेगावाट क्षमता का उर्जा भंडारण तथा 2164 मेगावाट का बैटरी उर्जा भंडारण विकसित किया जा रहा है।
इस अवसर पर नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक-सह-ब्रेडा के निदेशक श्री राहुल कुमार ने कहा कि वर्ष 2034-35 तक राज्य में 18 हजार मेगावाट बिजली की मांग होगी। इसे पूरा करने के लिए रिन्यूएवल एनर्जी आधारित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 11 हजार मेगावाट का पावर पर्चेज एग्रिमेंट है इसमें 65 प्रतिशत थरमल पावर है। शेष बिजली रिन्यूएवल एनर्जी है। उन्होंने ने बताया कि राज्य के 11,700 सरकारी भवनों पर सोलर पावर लग चुका है।
समन्वयक श्री सुबोध कुमार ने बिहार एनर्जी एक्सपों 2025 के तीन दिनों में आयोजित कार्यक्रमों के बारे में सारांष प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस एक्सपो के माध्यम से सरकार, उपभोक्ता और मैन्युफैक्चरर को एक छत के नीचे लाने का सफल प्रयास किया गया।
अध्यक्ष श्री केपीएस केशरी ने इस अवसर पर केन्द्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए कृषि और ऊर्जा विभाग में समन्वयन की आवष्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि राज्य में सोलर पावर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन के बाद ग्रिड तक बिजली पहुंचाने के लिए कोई बिलिंग चार्ज नहीं लिया जाय।
प्रदर्षनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नोवासिस ग्रीन एनर्जी को पहला पुरस्कार, पहल सोलर को दूसरा एवं पावर वन माइक्रो सिस्टम को तीसरे पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
समापन समारोह के अन्त में महासचिव श्री अमरनाथ जयसवाल के धन्यवाद के साथ तीन-दिवसीय सेमिनार-सह-प्रदर्शनी बिहार रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपो 2025 का समापन किया गया।